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Rigveda / 9 / 62 / 20

आ त॑ इन्दो॒ मदा॑य॒ कं पयो॑ दुहन्त्या॒यव॑: । दे॒वा दे॒वेभ्यो॒ मधु॑ ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 62 | Mantra No : 20

In Hindi:

ऋषि : जमदग्निः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : आ । ते॒ । इ॒न्दो॒ इति॑ । मदा॑य । कम् । पयः॑ । दु॒ह॒न्ति॒ । आ॒यवः॑ । दे॒वाः । दे॒वेभ्यः॑ । मधु॑ ॥ ९.६२.२०

पदार्थ : (इन्दो) हे परमैश्वर्यशालिन् ! (ते) आपके (मदाय) आनन्द के लिये (आयवः देवाः) दिव्य शक्तिवाले आपके अनुयायी लोग (देवेभ्यः) ज्ञानक्रियाशाली विद्वानों से (मधु) सुन्दर भोग योग्य (पयः) दूध रूपी (कम्) सुख को (आ) भली-भाँति (दुहन्ति) दुहते हैं ॥२०॥

भावार्थ : हे परमात्मन् ! आपके अनुयायी लोग कामधेनुरूप पृथिव्यादिलोक-लोकान्तरों से अनन्त प्रकार के अमृतों को दुहते हैं ॥२०॥