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Rigveda / 9 / 63 / 21

वृष॑णं धी॒भिर॒प्तुरं॒ सोम॑मृ॒तस्य॒ धार॑या । म॒ती विप्रा॒: सम॑स्वरन् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 63 | Mantra No : 21

In Hindi:

ऋषि : निध्रुविः काश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : वृष॑णम् । धी॒भिः । अ॒प्ऽतुर॑म् । सोम॑म् । ऋ॒तस्य॑ । धार॑या । म॒ती । विप्राः॑ । सम् । अ॒स्व॒र॒न् ॥ ९.६३.२१

पदार्थ : (विप्राः) मेधावीजन (वृषणं) कामनाओं की वृष्टि करानेवाले (सोमम्) परमात्मा को (धीभिः) शुद्धबुद्धि द्वारा (मती) स्तुति से तथा (ऋतस्य धारया) सत्य की धारणा से (समस्वरन्) बुद्धिविषय करते हैं ॥२१॥

भावार्थ : इस मन्त्र से परमात्मा के साक्षात्कार करने का उपदेश किया है ॥२१॥