Rigveda / 9 / 63 / 29
अ॒प॒घ्नन्त्सो॑म र॒क्षसो॒ऽभ्य॑र्ष॒ कनि॑क्रदत् । द्यु॒मन्तं॒ शुष्म॑मुत्त॒मम् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 63 | Mantra No : 29
In English:
Seer : nidhruviH kaashyapaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : kakummatiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : apaghnantsoma rakShaso.abhyarSha kanikradat . dyumanta.m shuShmamuttamam .
Component Words : apa.aghnan . soma . rakShashaH . abhi . aarSha . kanikradat . dyu.amantam . shuShmam . ut.atamam . 9.63.29
In Hindi:
ऋषि : निध्रुविः काश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : ककुम्मतीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : अ॒प॒ऽघ्नन् । सो॒म॒ । र॒क्षशः॑ । अ॒भि । आ॒र्ष॒ । कनि॑क्रदत् । द्यु॒ऽमन्त॑म् । शुष्म॑म् । उ॒त्ऽत॒मम् ॥ ९.६३.२९
पदार्थ : (सोम) हे सौम्यगुण सम्पन्न विद्वन् ! आप (रक्षसः) राक्षसों का (अपघ्नन्) नाश करते हुए (कनिक्रदत्) और शूरवीरता का उपदेश करते हुए (उत्तमं) उत्तम (द्युमन्तं) दीप्तिवाला (शुष्मम्) बल (अभ्यर्ष) हमको दें ॥२९॥
भावार्थ : जिस देश में सौम्यस्वभावयुक्त शूरवीर उत्पन्न होते हैं, उस देश में सर्वोपरि बल और ऐश्वर्य उत्पन्न होता है। तात्पर्य यह है कि ऐश्वर्य उत्पन्न करने के लिये धीरवीरतादि गुणों का धारण करना अत्यावश्यक है ॥२९॥
In Sanskrit:
ऋषि : निध्रुविः काश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : ककुम्मतीगायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : अ॒प॒ऽघ्नन् । सो॒म॒ । र॒क्षशः॑ । अ॒भि । आ॒र्ष॒ । कनि॑क्रदत् । द्यु॒ऽमन्त॑म् । शुष्म॑म् । उ॒त्ऽत॒मम् ॥ ९.६३.२९
भावार्थ :