Rigveda / 9 / 64 / 6
ते विश्वा॑ दा॒शुषे॒ वसु॒ सोमा॑ दि॒व्यानि॒ पार्थि॑वा । पव॑न्ता॒मान्तरि॑क्ष्या ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 64 | Mantra No : 6
In English:
Seer : kashyapaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : te vishvaa daashuShe vasu somaa divyaani paarthivaa . pavantaamaantarikShyaa .
Component Words : te . vishvaa . daashuShe . vasu . somaaH . divyaani . paarthivaa . pavantaam . aa . antarikShyaa . 9.64.6
In Hindi:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : ते । विश्वा॑ । दा॒शुषे॑ । वसु॑ । सोमाः॑ । दि॒व्यानि॑ । पार्थि॑वा । पव॑न्ताम् । आ । अ॒न्तरि॑क्ष्या ॥ ९.६४.६
पदार्थ : (ते सोमाः) पूर्वोक्त गुणसम्पन्न परमात्मा (दिव्यानि) द्युलोक के (पार्थिवा) पृथिवीलोक के (अन्तरिक्ष्या) अन्तरिक्षलोक के (विश्वा) सब (वसु) धन (दाशुषे) जिज्ञासु वेदानुयायियों को (आ पवन्ताम्) दें ॥६॥
भावार्थ : जो लोग परमात्मा की आज्ञा का पालन करते हैं, परमात्मा उनको सब प्रकार के ऐश्वर्य प्रदान करता है ॥६॥
In Sanskrit:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : ते । विश्वा॑ । दा॒शुषे॑ । वसु॑ । सोमाः॑ । दि॒व्यानि॑ । पार्थि॑वा । पव॑न्ताम् । आ । अ॒न्तरि॑क्ष्या ॥ ९.६४.६
भावार्थ :