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Rigveda / 9 / 66 / 19

अग्न॒ आयूं॑षि पवस॒ आ सु॒वोर्ज॒मिषं॑ च नः । आ॒रे बा॑धस्व दु॒च्छुना॑म् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 66 | Mantra No : 19

In Hindi:

ऋषि : शतं वैखानसाः | देवता : अग्निः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : अग्ने॑ । आयूं॑षि । प॒व॒से॒ । आ । सु॒व॒ । ऊर्ज॑म् । इष॑म् । च॒ । नः॒ । आ॒रे । बा॒ध॒स्व॒ । दु॒च्छुना॑म् ॥ ९.६६.१९

पदार्थ : (अग्ने) हे ज्ञानस्वरूप परमात्मन् ! आप (आयूंषि) हमारी आयु को (पवसे) पवित्र करते हैं (च) और (नः) हमारे लिए (इषम्) ऐश्वर्य और (ऊर्जम्) बल (आसुव) दें। तथा (दुच्छुनाम्) विघ्नकारी राक्षसों को हमसे (आरे) दूर (बाधस्व) करें ॥१९॥

भावार्थ : इस मन्त्र में परमात्मा ने विघ्नकारी राक्षसों से बचने का उपदेश किया है कि हे पुरुषों ! तुम विघ्नकारी अवैदिक पुरुष जो राक्षस हैं, उनके हटाने में सदैव तत्पर रहो ॥१९॥