Rigveda / 9 / 86 / 19
वृषा॑ मती॒नां प॑वते विचक्ष॒णः सोमो॒ अह्न॑: प्रतरी॒तोषसो॑ दि॒वः । क्रा॒णा सिन्धू॑नां क॒लशाँ॑ अवीवश॒दिन्द्र॑स्य॒ हार्द्या॑वि॒शन्म॑नी॒षिभि॑: ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 86 | Mantra No : 19
In English:
Seer : sikataa nivaavaarii | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRijjagatii | Tone : niShaadaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : vRRiShaa matiinaa.m pavate vichakShaNaH somo ahnaH pratariitoShaso divaH . kraaNaa sindhuunaa.m kalashaa.N aviivashadindrasya haardyaavishanmaniiShibhiH .
Component Words : vRRiShaa . matiinaam . pavate . vi.achakShaNaH . somaH . ahnaH . pra.atariitaa . uShasaH . divaH . kraaNaa . sindhuunaam . kalashaan . aviivashat . indrasya . haardi . aa.avishan . maniiShi.abhiH . 9.86.19
In Hindi:
ऋषि : सिकता निवावारी | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृज्जगती | स्वर : निषादः
विषय :
पदपाठ : वृषा॑ । म॒ती॒नाम् । प॒व॒ते॒ । वि॒ऽच॒क्ष॒णः । सोमः॑ । अह्नः॑ । प्र॒ऽत॒री॒ता । उ॒षसः॑ । दि॒वः । क्रा॒णा । सिन्धू॑नाम् । क॒लशा॑न् । अ॒वी॒व॒श॒त् । इन्द्र॑स्य । हार्दि॑ । आ॒ऽवि॒शन् । म॒नी॒षिऽभिः॑ ॥ ९.८६.१९
पदार्थ : परमात्मा (मनीषिभिः) सदुपदेशकों से उपदेश किया हुआ (इन्द्रस्य) कर्मयोगी के (हार्दि) हृदय में (आविशन्) प्रवेश करता हुआ (कलशान्) कर्मयोगियों के अन्तःकरणों की (अवीवशत्) कामना करता है। जो परमात्मा (दिवः) द्युलोक को (सिन्धूनां) स्यन्दनशील सूक्ष्म तत्त्वों का (क्राणा) कर्त्ता है और (अह्नः) दिन के (उषसः) ज्योतियों का (प्रतरीता) वर्द्धक है। (सोमः) वह सर्वोत्पादक परमात्मा (विचक्षणः) सर्वज्ञ परमेश्वर हमारी (मतीनां) उपासकों की कामनाओं की (वृषा) पूर्ति करनेवाला है, उक्त परमात्मा हम लोगों को (पवते) पवित्र करे ॥१९॥
भावार्थ : जो लोग सदुपदेशकों के सदुपदेश को श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं, उनके अन्तःकरणों को परमात्मा अवश्यमेव पवित्र करता है ॥१९॥
In Sanskrit:
ऋषि : सिकता निवावारी | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृज्जगती | स्वर : निषादः
पदपाठ : वृषा॑ । म॒ती॒नाम् । प॒व॒ते॒ । वि॒ऽच॒क्ष॒णः । सोमः॑ । अह्नः॑ । प्र॒ऽत॒री॒ता । उ॒षसः॑ । दि॒वः । क्रा॒णा । सिन्धू॑नाम् । क॒लशा॑न् । अ॒वी॒व॒श॒त् । इन्द्र॑स्य । हार्दि॑ । आ॒ऽवि॒शन् । म॒नी॒षिऽभिः॑ ॥ ९.८६.१९
भावार्थ :