Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 9 / 86 / 28

तवे॒माः प्र॒जा दि॒व्यस्य॒ रेत॑स॒स्त्वं विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य राजसि । अथे॒दं विश्वं॑ पवमान ते॒ वशे॒ त्वमि॑न्दो प्रथ॒मो धा॑म॒धा अ॑सि ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 86 | Mantra No : 28

In Hindi:

ऋषि : पृश्नयोऽजाः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : पादनिचृज्ज्गती | स्वर : निषादः

विषय :

पदपाठ : तव॑ । इ॒माः । प्र॒ऽजाः । दि॒व्यस्य॑ । रेत॑सः । त्वम् । विश्व॑स्य । भुव॑नस्य । रा॒ज॒सि॒ । अथ॑ । इ॒दम् । विश्व॑म् । प॒व॒मा॒न॒ । ते॒ । वशे॑ । त्वम् । इ॒न्दो॒ इति॑ । प्र॒थ॒मः । धा॒म॒ऽधाः । अ॒सि॒ ॥ ९.८६.२८

पदार्थ : (तव, दिव्यस्य, रेतसः) तुम्हारे दिव्य सामर्थ्य से (इमाः प्रजाः) ये सब प्रजा उत्पन्न हुई हैं। (त्वं) तुम (विश्वस्य भुवनस्य) सम्पूर्ण सृष्टि के (राजसि) राजा होकर विराजमान हो। (पवमान) हे सबको पवित्र करनेवाले परमात्मन् ! (इदं विश्वं) ये सम्पूर्ण संसार (ते वशे) तुम्हारे वश में है (अथ) और (इन्दो) हे प्रकाशस्वरूप परमात्मन् ! (त्वं प्रथमं) तुम ही पहले (धामधाः) सबके निवासस्थान (असि) हो ॥२८॥

भावार्थ : परमात्मा सबका अधिकरण है, इसलिये सब भूतों का निवासस्थान वही है ॥२८॥