Rigveda / 9 / 97 / 41
म॒हत्तत्सोमो॑ महि॒षश्च॑कारा॒पां यद्गर्भोऽवृ॑णीत दे॒वान् । अद॑धा॒दिन्द्रे॒ पव॑मान॒ ओजोऽज॑नय॒त्सूर्ये॒ ज्योति॒रिन्दु॑: ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 97 | Mantra No : 41
In English:
Seer : paraasharaH shaakttyaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : svaraaDaarchiitriShTup | Tone : dhaivataH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : mahattatsomo mahiShashchakaaraapaa.m yadgarbho.avRRiNiita devaan . adadhaadindre pavamaana ojo.ajanayatsuurye jyotirinduH .
Component Words : mahat . tat . somaH . mahiShaH . chakaara . apaam . yat . garbhaH . avRRiNiita . devaan . adadhaat . indre . pavamaanaH . ojaH . ajanayat . suurye . jyotiH . induH . 9.97.41
In Hindi:
ऋषि : पराशरः शाक्त्त्यः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : स्वराडार्चीत्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
विषय :
पदपाठ : म॒हत् । तत् । सोमः॑ । म॒हि॒षः । च॒का॒र॒ । अ॒पाम् । यत् । गर्भः॑ । अवृ॑णीत । दे॒वान् । अद॑धात् । इन्द्रे॑ । पव॑मानः । ओजः॑ । अज॑नयत् । सूर्ये॑ । ज्योतिः॑ । इन्दुः॑ ॥ ९.९७.४१
पदार्थ : (इन्दुः) जो प्रकाशस्वरूप परमात्मा (सूर्ये) भौतिक सूर्य में (ज्योतिः) प्रकाश को (अजनयत्) उत्पन्न करता है और (पवमानः) सबको पवित्र करनेवाला वह परमात्मा (इन्द्रे) कर्मयोगी के लिये (ओजः) ज्ञानप्रकाशरूपी बल (अदधात्) धारण कराता है और (महिषः) महान् (सोमः) सोम (तत्, महत्) उस बड़े काम को (चकार) करता है, (यत्) जो (अपाम्) वाष्प-रूप-प्रकृति के अंशों में (देवान्) सूर्यादि दिव्य पदार्थों के (गर्भः) उत्पत्तिरूप गर्भ से (अवृणीत) वरण किया गया है ॥४१॥
भावार्थ : इस मन्त्र में परमात्मा को सूर्य्यादिकों के प्रकाशकरूप से वर्णन किया है, इसी अभिप्राय से उपनिषत्कार ऋषियों ने परमात्मा को सूर्य्यादिकों का प्रकाशक माना है ॥४१॥
In Sanskrit:
ऋषि : पराशरः शाक्त्त्यः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : स्वराडार्चीत्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः
पदपाठ : म॒हत् । तत् । सोमः॑ । म॒हि॒षः । च॒का॒र॒ । अ॒पाम् । यत् । गर्भः॑ । अवृ॑णीत । दे॒वान् । अद॑धात् । इन्द्रे॑ । पव॑मानः । ओजः॑ । अज॑नयत् । सूर्ये॑ । ज्योतिः॑ । इन्दुः॑ ॥ ९.९७.४१
भावार्थ :