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Rigveda / 9 / 109 / 20

अ॒ञ्जन्त्ये॑नं॒ मध्वो॒ रसे॒नेन्द्रा॑य॒ वृष्ण॒ इन्दुं॒ मदा॑य ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 109 | Mantra No : 20

In Hindi:

ऋषि : अग्नयो धिष्ण्या ऐश्वराः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : आर्चीगायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : अ॒ञ्जन्ति॑ । ए॒न॒म् । मध्वः॑ । रसे॑न । इन्द्रा॑य । वृष्णे॑ । इन्दु॑म् । मदा॑य ॥ ९.१०९.२०

पदार्थ : (एनं) उक्त परमात्मा को (मध्वः, रसेन) उसके माधुर्य्ययुक्त रस से (वृष्णे) सब कामनाओं को पूर्ण करनेवाले (इन्द्राय) कर्मयोगी के (मदाय) आनन्द के लिये (इन्दुं) स्वप्रकाश परमात्मा का उपासक लोग (अञ्जन्ति) ज्ञानवृत्ति द्वारा योग करते हैं ॥२०॥

भावार्थ : परमात्मयोग के अर्थ ब्रह्मविषयणी वृत्ति द्वारा परमात्मा के योग का नाम “परमात्मयोग” है अर्थात् उपासक लोग ज्ञानवृत्ति द्वारा परमात्मा के समीपी होकर परमात्मरूप माधुर्य रस को पान करते हुए तृप्त होते हैं ॥२०॥