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Rigveda / 10 / 90 / 2

पुरु॑ष ए॒वेदं सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भव्य॑म् । उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 90 | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : नारायणः | देवता : पुरुषः | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : पुरु॑षः । ए॒व । इ॒दम् । सर्व॑म् । यत् । भू॒तम् । यत् । च॒ । भव्य॑म् । उ॒त । अ॒मृ॒त॒ऽत्वस्य॑ । ईशा॑नः । यत् । अन्ने॑न । अ॒ति॒ऽरोह॑ति ॥ १०.९०.२

पदार्थ : (पुरुषः-एव) परमपुरुष परमात्मा ही (अमृतत्वस्य-ईशानः) मोक्ष का स्वामी अधिष्ठाता है (उत) और (इदं सर्वं यत्-भूतं यत्-च भव्यम्) यह सब जो उत्पन्न हुआ, जो होनेवाला जगत् है तथा (यत्-अन्नेन-अतिरोहति) जो अन्न-भोजन से बढ़ता है जीवमात्र, उसका भी परमपुरुष परमात्मा स्वामी है ॥२॥

भावार्थ : परमपुरुष परमात्मा जीवमात्र का तथा तदर्थ भोग अपवर्ग-मोक्ष का एवं सब उत्पन्न हुए होनेवाले जगत् का स्वामी है, ऐसा मान कर उसकी स्तुति करनी चाहिए ॥२॥