Rigveda / 10 / 145 / 6
उप॑ तेऽधां॒ सह॑मानाम॒भि त्वा॑धां॒ सही॑यसा । मामनु॒ प्र ते॒ मनो॑ व॒त्सं गौरि॑व धावतु प॒था वारि॑व धावतु ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 145 | Mantra No : 6
In English:
Seer : indraaNii | Devta : upaniShatsapatniibaadhanam | Metre : nichRRitpa~Nkti | Tone : pa~nchamaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : upa te.adhaa.m sahamaanaamabhi tvaadhaa.m sahiiyasaa . maamanu pra te mano vatsa.m gauriva dhaavatu pathaa vaariva dhaavatu .
Component Words : upa . te . adhaam . sahamaanaam . abhi . tvaa . adhaam . sahiiyasaa . maam . anu . pra . te . manaH . vatsam . gauH.aiva . dhaavatu . pathaa . vaaH.aiva . dhaavatu . 10.145.6
In Hindi:
ऋषि : इन्द्राणी | देवता : उपनिषत्सपत्नीबाधनम् | छन्द : निचृत्पङ्क्ति | स्वर : पञ्चमः
विषय :
पदपाठ : उप॑ । ते॒ । अ॒धा॒म् । सह॑मानाम् । अ॒भि । त्वा॒ । अ॒धा॒म् । सही॑यसा । माम् । अनु॑ । प्र । ते॒ । मनः॑ । व॒त्सम् । गौःऽइ॑व । धा॒व॒तु॒ । प॒था । वाःऽइ॑व । धा॒व॒तु॒ ॥ १०.१४५.६
पदार्थ : (ते) हे अध्यात्मप्रिय जन ! तेरे लिये (सहमानाम्) कामवासना को दबानेवाली सोम ओषधि को (उप-अधाम्) सहाय्यरूप से समर्पित करती हूँ पीने के लिये (त्वा) तुझे (सहीयसा) बलवान् सोम से (अभि अधाम्) अभिधारण करती हूँ, मैं उपनिषद् अध्यात्मविद्या अपने में धारण करती हूँ। (ते मनः) तेरा मन (माम्-अनु प्र धावतु) मुझे अनुसरण करता हुआ प्रगति करे (गौः-इव वत्सम्) जैसे गौ बछड़े को अनुसरण कर चलती है (वाः यथा धावतु) जल नीचे मार्ग से बहता है तथा मुझ उपनिषद्-अध्यात्मविद्या का अनुसरण कर ॥६॥
भावार्थ : अध्यात्मविद्या का सहायक सोम ओषधि है, उसे भी अध्यात्मप्रेमी सेवन करे, अध्यात्मविद्या के प्रति अनुराग ऐसा होना चाहिए, जैसे गौ का बछड़े के प्रति, जैसे जल निम्न मार्ग के प्रति बह जाता है ॥६॥
In Sanskrit:
ऋषि : इन्द्राणी | देवता : उपनिषत्सपत्नीबाधनम् | छन्द : निचृत्पङ्क्ति | स्वर : पञ्चमः
पदपाठ : उप॑ । ते॒ । अ॒धा॒म् । सह॑मानाम् । अ॒भि । त्वा॒ । अ॒धा॒म् । सही॑यसा । माम् । अनु॑ । प्र । ते॒ । मनः॑ । व॒त्सम् । गौःऽइ॑व । धा॒व॒तु॒ । प॒था । वाःऽइ॑व । धा॒व॒तु॒ ॥ १०.१४५.६
भावार्थ :