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Rigveda / 10 / 157 / 3

आ॒दि॒त्यैरिन्द्र॒: सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 10 | Sukta : 157 | Mantra No : 3

In Hindi:

ऋषि : भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः | देवता : विश्वेदेवा: | छन्द : द्विपदात्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः

विषय :

पदपाठ : आ॒दि॒त्यैः । इन्द्रः॑ । सऽग॑णः । म॒रुत्ऽभिः॑ । अ॒स्माक॑म् । भू॒तु॒ । अ॒वि॒ता । त॒नू॑नाम् ॥ १०.१५७.३

पदार्थ : (इन्द्र सगणः) राजा को अपने सभागण के साथ (आदित्यैः) अखण्डित न्यायाधीशों के साथ (मरुद्भिः) सैनिकों के साथ (अस्माकं तनूनाम्) हमारे जैसे जीवों के (अविता भूतु) रक्षक हो ॥३॥

भावार्थ : राजा अपने सभ्यगण न्यायाधीशों और सैनिकों सहित प्रजाजनों की रक्षा किया करें ॥३॥