Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 6 / 71 / 5

उदू॑ अयाँ उपव॒क्तेव॑ बा॒हू हि॑र॒ण्यया॑ सवि॒ता सु॒प्रती॑का। दि॒वो रोहां॑स्यरुहत्पृथि॒व्या अरी॑रमत्प॒तय॒त्कच्चि॒दभ्व॑म् ॥५॥

Veda : Rigveda | Mandal : 6 | Sukta : 71 | Mantra No : 5

In Hindi:

ऋषि : भरद्वाजो बार्हस्पत्यः | देवता : सविता | छन्द : निचृत्त्रिष्टुप् | स्वर : धैवतः

विषय : फिर वह राजा किसके तुल्य कैसा हो, इस विषय को कहते हैं ॥

पदपाठ : उत्। ऊँ॒ इति॑। अ॒या॒न्। उ॒प॒व॒क्ताऽइ॑व। बा॒हू इति॑। हि॒र॒ण्यया॑। स॒वि॒ता। सु॒ऽप्रती॑का। दि॒वः। रोहां॑सि। अ॒रु॒ह॒त्। पृ॒थि॒व्याः। अरी॑रमत्। प॒तय॑त्। कत्। चि॒त्। अभ्व॑म् ॥५॥

पदार्थ : हे मनुष्यो ! जैसे (सविता) सूर्यमण्डल (दिवः) आकाश की (रोहांसि) चढ़ाइयों को (अरुहत्) चढ़ता है और (पृथिव्याः) अन्तरिक्ष के मध्य में भूमि के समस्त (अभ्वम्) महान् न्याय को (अरीरमत्) वर्त्तावे (चित्) और (पतयत्) पति के समान आचरण करे, वैसे जिसकी (सुप्रतीका) सुन्दर प्रतीति करनेवाले काम जिनसे होते ऐसे (हिरण्यया) हिरण्य के समान सुदृढ़ सुशोभित (बाहू) भुजा वर्त्तमान है, वह (उ) हो (उपवक्तेव) समीप कहनेवाले के समान (कत्) कब (उत्, अयान्) उदय हो ॥५॥

भावार्थ : इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। हे राजन् ! आप कब सूर्य के समान न्याय और विनय से प्रकाशित सुन्दर दृढ़ अङ्गयुक्त, श्रेष्ठ धर्मज्ञ विद्वानों के समान वक्ता होओ। जैसे इस जगत् में सर्वोपकार के लिये ईश्वर ने सूर्य बनाया है, वैसे ही सब के सुख के लिये राजा बनाया है ॥५॥