Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Samveda/1107

अग्ने त्वं नो अन्तम उत त्राता शिवो भुवो वरूथ्यः॥११०७

Veda : Samveda | Mantra No : 1107

In Hindi:

ऋषि : बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गोपायना लौपायना वा | देवता : अग्निः | छन्द : द्विपदा विराट् | स्वर : पञ्चमः

विषय : प्रथम ऋचा की पूर्वार्चिक में ४४८ क्रमाङ्क पर परमात्मा और राजा के विषय में व्याख्या की जा चुकी है। यहाँ परमात्मा, राजा और आचार्य तीनों का विषय है।

पदपाठ : अग्ने ।त्वम् ।नः ।अन्तमः ।उत ।त्राता ।शिवः ।भुवः ।वरूथ्य॥

पदार्थ : हे (अग्ने) अग्रनायक परमात्मन्, राजन् वा विद्वन् आचार्य ! आप (नः) हमारे (अन्तमः) निकटतम (उत) और (त्राता) अपराधों से रक्षा करनेवा्ले, तथा (शिवः) मङ्गलकारी, (वरूथ्यः) और वरणीय (भुवः) होओ ॥१॥

भावार्थ : परमात्मा, राजा और आचार्य का संरक्षण पाकर लोग दोषों से मुक्त, निरपराध, निश्छल, निष्पाप,विद्वान्, ब्रह्मज्ञ और सदाचारी हो जाते हैं ॥१॥