In Hindi:
महर्षि दयानन्द व्याख्या : १३. क्रयविक्रयप्रकरणम्
१ अस्य किं मूल्यम्? इसका क्या मूल्य है?
२ पञ्च रूप्याणि। पांच रुपये।
३ गृहाणेदं वस्त्रं देहि। लीजिये पांच रुपये, यह वस्त्र दीजिये।
४ अद्य श्वो घृतस्य कोऽर्घः? आजकल घी का क्या भाव है?
५ मुद्रैकया सापदप्रस्थं विक्रीणते। एक रुपये का सवा सेर बेचते हैं।
६ गुडस्य को भावः? गुड़ का क्या भाव है?
७ द्वाभ्यामानाभ्यामेकसेटकमात्रं ददति। दो आने का एक सेर भर देते हैं।
८ भो आपणं गच्छ, एला आनय। तू बाजार को जा, इलायची ले आ।
९ आनीताः, गृहाण। लाई, लीजिए।
१० कस्य हट्टे दधिदुग्धे अच्छे प्राप्नुतः? किसकी दुकान पर अच्छे दूध और दही मिलते हैं?
११ धनपालस्य। धनपाल की।
१२ स सत्येनैव क्रयविक्रयौ करोति। वह सत्य से ही लेन-देन करता है।
१३ श्रीपतिर्वर्णिीं॑दृशोऽस्ति? श्रीपति बनियां कैसा है?
१४ स मिथ्याकारी। वह झूठा है।
१५ अस्मिन्संवत्सरे कियान् लाभो व्ययश्च जातः। इस वर्ष में कितना लाभ और खर्च हुआ?
१६ पञ्च लक्षाणि लाभो लक्षद्वयस्य व्ययश्च। पांच लाख रुपये लाभ और दो लाख खर्च हुए।
१७ मम खल्वस्मिन् वर्षे लक्षद्वयस्य हानिर्जाता। मेरी तो इस वर्ष में दो लाख की हानि हो गई।
१८ कस्तूरी कस्मादानीयते? कस्तूरी कहां से लाते हो?
१९ नेपालात्। नेपाल से।
२० द्विशालाः कुत आगच्छन्ति? दुशाले कहां से लाते हैं?
२१ कश्मीरात्। कश्मीर से।