In Hindi:
संस्कृत में सूत्र की भूमिका : मूल प्रार्थना
महर्षि दयानन्द व्याख्या : व्याख्यान—हे सोम! राजन्नीश्वर! तुम “अघायतः” जो कोई प्राणी हममें पापी और पाप करने की इच्छा करनेवाले हों “विश्वतः” उन सब प्राणियों से हमारी “रक्ष” रक्षा करो, जिसके आप सगे मित्र हो “न, रिष्येत्” वह कभी विनष्ट नहीं होता, किन्तु हमको आपके सहाय से तिलमात्र भी दुःख वा भय कभी नहीं होगा, जो आपका मित्र और जिसके आप मित्र हो, उसको दुःख क्योंकर हो॥२०॥