Atharvaveda / 1 / 3 / 5
वि॒द्मा श॒रस्य॑ पि॒तरं॒ सूर्यं॑ श॒तवृ॑ष्ण्यम्। तेना॑ ते त॒न्वे॑३ शं क॑रं पृथि॒व्यां ते॑ नि॒षेच॑नं ब॒हिष्टे॑ अस्तु॒ बालिति॑ ॥ 5॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 1 | Sukta : 3 | Paryay : | Mantra No : 5
In English:
Seer : atharvaa | Devta : suuryaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : vidmaa sharasya pitara.m suurya.m shatavRRiShNyam. tenaa te tanve3 sha.m kara.m pRRithivyaa.m te niShechana.m bahiShTe astu baaliti . 5.
Component Words : vidma . sharasya . pitaram . suuryam . shata.avRRiShNyam .tena . te . tanve . sham . karam . pRRithivyaam . te . ni.asechanam . bahiH . te . astu . baal . iti .
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : सूर्यः | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर :
विषय : शान्ति के लिये उपदेश।
पदपाठ : वि॒द्म । शरस्य॑ । पि॒तर॑म् । सूर्य॑म् । श॒तऽवृ॑ष्ण्यम् ।तेन॑ । ते॒ । त॒न्वे । शम् । क॒र॒म् । पृ॒थि॒व्याम् । ते॒ । नि॒ऽसेच॑नम् । ब॒हिः । ते॒ । अ॒स्तु॒ । बाल् । इति॑ ॥
पदार्थ : (शरस्य) शत्रुनाशक [वा बाणधारी] शूर के (पितरम्) रक्षक, पिता (सूर्यम्) चलनेवाले वा चलानेवाले सूर्य समान [उपकारी] (शतवृष्ण्यम्) सैकड़ों सामर्थ्यवाले [परमेश्वर] को (विद्म) हम जानते हैं। (तेन) उस [ज्ञान] से (ते) तेरे (तन्वे) शरीर के लिये (शम्) नीरोगता (करम्) मैं करूँ और (पृथिव्याम्) पृथिवी पर (ते) तेरा (निसेचनम्) बहुत सेचन [वृद्धि] होवे और (ते) तेरा (बाल्) वैरी (बहिः) बाहिर (अस्तु) होवे, (इति) बस यही ॥५॥"
भावार्थ : (सूर्य) आकाश में वायु से चलता है और लोकों को चलाता और वृष्टि आदि उपकार करता और बड़ा तेजस्वी है। वह परब्रह्म उस सूर्य का भी सूर्य है। उसके उपकारों को जानकर तेजस्वी मनुष्य परस्पर उन्नति करते हैं ॥५॥
टिप्पणी :५−सूर्यम्। राजसूयसूर्येत्यादिना। पा० ३।१।११४। इति सृ सरणे क्यप्। निपातनाद् ऋकारस्य ऊत्वम्। सरत्याकाशे स सूर्यः। यद्वा, षू प्रेरणे, तुदादिः−क्यप्, रुट् आगमः। सुवति प्रेरयति लोकान् कर्मणि स सूर्यः। यद्वा सु+ईर गतौ कर्मणि क्यपि निपात्यते। वायुना। सुष्ठु ईर्यते प्रेर्य्यते स सूर्यः। सूर्यः सर्त्तेर्वा सुवतेर्वा स्वीर्य्यतेर्वा। इति यास्कः−निरु० १२।१४। आदित्यम्, सूर्यवत् उपकारकम्। शेषम्−व्याख्यातम् मं० १ ॥