Atharvaveda / 9 / 6 / 6 / 1
यत्क्ष॒त्तारं॒ ह्वय॒त्या श्रा॑वयत्ये॒व तत् ॥ 1॥
Veda : Atharvaveda | Paryay : 6 | Sukta : 6 | Paryay : 12 | Mantra No : 1
In English:
Seer : brahmaa | Devta : atithiH, vidyaa | Metre : aasurii gaayatrii | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : yatkShattaara.m hvayatyaa shraavayatyeva tat . 1.
Component Words : yat . kShattaaram . hvayati . aa . shraavayati . eva . tat .11.1.
In Hindi:
ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : आसुरी गायत्री | स्वर :
विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।
पदपाठ : यत् । क्ष॒त्तार॑म् । ह्वय॑ति । आ । श्रा॒व॒य॒ति॒ । ए॒व । तत् ॥११.१॥
पदार्थ : (यत्) जब वह [अतिथि] (क्षत्तारम्) कष्ट से तारनेवाले [धर्मात्मा गृहस्थ] को (ह्वयति) बुलाता है, (तत्) तब वह [अतिथि] (एव) निश्चय करके (आ श्रावयति) आदेश सुनाता है ॥१॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१−(यत्) यदा (क्षत्तारम्) अ० ३।२४।७। क्षतः क्षतात् तारकं धर्मात्मानं गृहस्थम् (ह्वयति) आह्वयति (आश्रावयति) आदिशति स्वप्रयोजनम् (एव) (तत्) तदा ॥