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Atharvaveda / 9 / 6 / 6 / 2

यत्प्र॑तिशृ॒णोति॑ प्र॒त्याश्रा॑वयत्ये॒व तत् ॥ 2॥

Veda : Atharvaveda | Paryay : 6 | Sukta : 6 | Paryay : 12 | Mantra No : 2

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अतिथिः, विद्या | छन्द : साम्न्यनुष्टुप् | स्वर :

विषय : अतिथि के सत्कार का उपदेश।

पदपाठ : यत् । प्र॒ति॒ऽशृ॒णोति॑ । प्र॒ति॒ऽआश्रा॑वयति । ए॒व । तत् ॥११.२॥

पदार्थ : (यत्) जब वह [गृहस्थ] (प्रतिशृणोति) ध्यान से सुनता है, (तत्) तब (एव) ही वह [अतिथि] (प्रत्याश्रावयति) ध्यान से [उपदेश] सुनाता है ॥२॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२−(प्रतिशृणोति) प्रतीत्य श्रद्धया शृणोति (प्रत्याश्रावयति) श्रद्धयोपदिशति। अन्यत् पूर्ववत् ॥