Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Atharvaveda / 13 / 1 / 26

रोहि॑तो॒ दिव॒मारु॑हन्मह॒तः पर्य॑र्ण॒वात्। सर्वो॑ रुरोह॒ रोहि॑तो॒ रुहः॑ ॥ 26॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 13 | Sukta : 1 | Paryay : | Mantra No : 26

In Hindi:

ऋषि : ब्रह्मा | देवता : अध्यात्मम्, रोहितः, आदित्यः | छन्द : विराट्परोष्णिक् | स्वर :

विषय : जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।

पदपाठ : रोहि॑त: । दिव॑म् । आ । अ॒रु॒ह॒त् । म॒ह॒त: । परि॑ । अ॒र्ण॒वात् । सर्वा॑: । रु॒रो॒ह॒ । रोह‍ि॑त: । रुह॑: ॥१.२६॥

पदार्थ : (रोहितः) सबके उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर] ने (महतः) विशाल (अर्णवात्) समुद्र [अगम्य सामर्थ्य] में से (दिवम्) व्यवहार को (परि) सब ओर से (आ अरुहत्) प्रकट किया है। (रोहितः) सबके उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर] ने (सर्वाः) सब (रुहः) उत्पन्न करने की सामग्रियों को (रुरोह) उत्पन्न किया है ॥२६॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :२६−(रोहितः) सर्वोत्पादकः (दिवम्) प्रत्येकव्यवहारम् (आ अरुहत्) प्रादुष्कृतवान् (महतः) विशालात् (परि) सर्वतः (अर्णवात्) समुद्रात्। अगम्यसामर्थ्यात् (सर्वाः) (रुरोह) जनयामास (रोहितः) (रुहः) सृष्टिसामग्रीः ॥