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Atharvaveda / 19 / 23 / 3

ष॑डृऋ॒चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 3॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 3

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : दैवी त्रिष्टुप् | स्वर :

विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदपाठ : ष॒ट्ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.३॥

पदार्थ : (षडृचेभ्यः) छह [वसन्त, ग्रीष्म, वर्षा, शरद्, हेमन्त, शिशिर, छह ऋतुओं] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥३॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :३−(षडृचेभ्यः) म०१०। षण्णां वसन्तादिषड्ऋतूनां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः। वसन्त इन्नु रन्त्यो ग्रीष्म इन्नु रन्त्यः। वर्षाण्यनु शरदो हेमन्तः शिशिर इन्नु रन्त्यः। साम० पू०६।१३।२। इति षड् ऋतवः ॥