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Atharvaveda / 19 / 23 / 4

स॑प्त॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 4॥

Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 4

In Hindi:

ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : दैवी त्रिष्टुप् | स्वर :

विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।

पदपाठ : सप्तऽऋचेभ्यः। स्वाहा ॥२३.४॥

पदार्थ : (सप्तर्चेभ्यः) सात [दो कान, दो नथने, दो आँखें और एक मुख-अथर्व०१०।२।६ इनकी] स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥४॥"

भावार्थ :

टिप्पणी :४−(सप्तर्चेभ्यः) म०१। कः सप्त खानि वि ततर्द शीर्षणि कर्णाविमौ नासिके चक्षणी मुखम्-अथर्व०१०।२।६। इत्येतेषां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥