Atharvaveda / 19 / 23 / 10
त्र॑योदश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 10॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 10
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : trayodasharchebhyaH svaahaa . 10.
Component Words : trayodasha.aRRichebhyaH. svaahaa .23.10.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : त्र॒यो॒द॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑। स्वाहा॑ ॥२३.१०॥
पदार्थ : (त्रयोदशर्चेभ्यः) तेरह [उछालना, गिराना, सकोड़ना, फैलाना और चलना पाँच कर्म तथा छोटाई, हलकायी, प्राप्ति, स्वतन्त्रता, बड़ाई, ईश्वरपन, जितेन्द्रियता और सत्य संकल्प आठ ऐश्वर्य इन तेरह] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥१०॥"
भावार्थ : टिप्पणी :१०−(त्रयोदशर्चेभ्यः) म०१। उत्क्षेपणमवक्षेपणमाकुञ्चनं प्रसारणं गमनमिति कर्माणि-वैशेषिके १।१।७। अणिमा लघिमा प्राप्तिः प्राकाम्यं महिमा तथा। ईशित्वं च वशित्वं च तथा कामावसायिता ॥१॥ इत्यष्टैश्वर्याणि। इत्येतेषां त्रयोदशानां स्तुत्या विद्या येषु तेभ्यो वेदेभ्यः ॥