Atharvaveda / 19 / 23 / 11
च॑तुर्दश॒र्चेभ्यः॒ स्वाहा॑ ॥ 11॥
Veda : Atharvaveda | Kand : 19 | Sukta : 23 | Paryay : | Mantra No : 11
In English:
Seer : atharvaa | Devta : mantroktaaH | Metre : anuShTup | Tone :
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready.
Verse : chaturdasharchebhyaH svaahaa . 11.
Component Words : chaturdasha.aRRichebhyaH.svaahaa .23.11.
In Hindi:
ऋषि : अथर्वा | देवता : मन्त्रोक्ताः | छन्द : प्राजापत्या गायत्री | स्वर :
विषय : ब्रह्मविद्या का उपदेश।
पदपाठ : च॒तु॒र्द॒श॒ऽऋ॒चेभ्यः॑।स्वाहा॑ ॥२३.११॥
पदार्थ : (चतुर्दशर्चेभ्यः) चौदह [कान, आँख, नासिका, जिह्वा, त्वचा−पाँच, ज्ञानेन्द्रिय, और वाक्, हाथ, पाँव, पायु, उपस्थ−पाँच कर्मेन्द्रिय, तथा मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार] की स्तुतियोग्य विद्यावाले [वेदों] के लिये (स्वाहा) स्वाहा [सुन्दर वाणी] हो ॥११॥"
भावार्थ : टिप्पणी :११−(चतुर्दशर्चेभ्यः) म०१। मनोबुद्धिचित्ताहङ्कारसहितानां दशेन्द्रियाणां स्तुत्या विद्या येषु वेदेषु तेभ्यः ॥