Rigveda / 8 / 2 / 8
त्रय॒: कोशा॑सः श्चोतन्ति ति॒स्रश्च॒म्व१॒॑: सुपू॑र्णाः । स॒मा॒ने अधि॒ भार्म॑न् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 2 | Mantra No : 8
In English:
Seer : medhaatithiH kaaNvaH priyamedhashchaa~NgirasaH | Devta : indra: | Metre : viraaDaarShiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : trayaH koshaasaH shchotanti tisrashchamva1H supuurNaaH . samaane adhi bhaarman .
Component Words : trayaH . koshaasaH . shchotanti . tisraH . chamvaH . su.apuurNaaH . samaane . adhi . bhaarman . 8.2.8
In Hindi:
ऋषि : मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः | देवता : इन्द्र: | छन्द : विराडार्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : अब शत्रुविजय के लिये सामग्री कथन करते हैं।
पदपाठ : त्रयः॑ । कोशा॑सः । श्चो॒त॒न्ति॒ । ति॒स्रः । च॒म्वः॑ । सुऽपू॑र्णाः । स॒मा॒ने । अधि॑ । भार्म॑न् ॥ ८.२.८
पदार्थ : (समाने, भार्मन्, अधि) समान संग्राम प्राप्त होने पर (त्रयः) तीन (कोशासः) अर्थसमूह (श्चोतन्ति) फल को प्राप्त करते हैं (तिस्रः) तीन (चम्वः) सेनाएँ (सुपूर्णाः) सुसज्जित फलप्रद होती हैं ॥८॥
भावार्थ : शत्रु के साथ संग्राम प्राप्त होने पर तीन प्रकार की सामग्री से विजय प्राप्त होती है अर्थात् (१) विद्याकोश=बुद्धिमान् सेनापति जो सेना को विचारपूर्वक संग्राम में प्रवृत्त करे (२) बलकोश=बलवान् सैनिकों का होना और (३) धनकोश=धन का पर्याप्त होना, ये तीन कोश जिसके पास पूर्ण होते हैं, वे अवश्य विजय को प्राप्त होते हैं, अन्य नहीं ॥८ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः | देवता : इन्द्र: | छन्द : विराडार्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : अथ शत्रुविजयसामग्री वर्ण्यते।
पदपाठ : त्रयः॑ । कोशा॑सः । श्चो॒त॒न्ति॒ । ति॒स्रः । च॒म्वः॑ । सुऽपू॑र्णाः । स॒मा॒ने । अधि॑ । भार्म॑न् ॥ ८.२.८
भावार्थ :