Rigveda / 8 / 2 / 16
व॒यमु॑ त्वा त॒दिद॑र्था॒ इन्द्र॑ त्वा॒यन्त॒: सखा॑यः । कण्वा॑ उ॒क्थेभि॑र्जरन्ते ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 2 | Mantra No : 16
In English:
Seer : medhaatithiH kaaNvaH priyamedhashchaa~NgirasaH | Devta : indra: | Metre : aarShiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : vayamu tvaa tadidarthaa indra tvaayantaH sakhaayaH . kaNvaa ukthebhirjarante .
Component Words : vayam . uu.N iti . tvaa . tatit.aarthaaH . indra . tvaa.ayantaH . sakhaayaH . kaNvaaH . ukthebhiH . jarante . 8.2.16
In Hindi:
ऋषि : मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः | देवता : इन्द्र: | छन्द : आर्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : अब कर्मयोगी की स्तुति करना कथन करते हैं।
पदपाठ : व॒यम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा । त॒तित्ऽअ॑र्थाः । इन्द्र॑ । त्वा॒ऽयन्तः॑ । सखा॑यः । कण्वाः॑ । उ॒क्थेभिः॑ । ज॒र॒न्ते॒ ॥ ८.२.१६
पदार्थ : (इन्द्र) हे कर्मयोगिन् ! (तदिदर्थाः) आप ही के समान प्रयोजनवाले, अतएव (सखायः) समान ख्यातिवाले (त्वायन्तः) आपकी कामना (उ) तथा (कण्वाः) ज्ञान के लिये परिश्रमण करते हुए (वयं) हम लोग (उक्थेभिः) आपके किये हुए कर्मों के स्तोत्रों द्वारा (त्वा) आपकी (जरन्ते) स्तुति करते हैं ॥१६॥
भावार्थ : इस मन्त्र में जिज्ञासुजन कर्मयोगी की स्तुति करते हुए यह कथन करते हैं कि हे भगवन् ! आप ऐसी कृपा करें कि हम लोग आपके समान सद्गुणसम्पन्न होकर समान ख्यातिवाले हों, आप हमारी इस कामना को पूर्ण करें ॥१६ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः | देवता : इन्द्र: | छन्द : आर्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : अथ जिज्ञासुभिः कर्मयोगिस्तवनं वर्ण्यते।
पदपाठ : व॒यम् । ऊँ॒ इति॑ । त्वा । त॒तित्ऽअ॑र्थाः । इन्द्र॑ । त्वा॒ऽयन्तः॑ । सखा॑यः । कण्वाः॑ । उ॒क्थेभिः॑ । ज॒र॒न्ते॒ ॥ ८.२.१६
भावार्थ :