Rigveda / 8 / 2 / 23
ज्येष्ठे॑न सोत॒रिन्द्रा॑य॒ सोमं॑ वी॒राय॑ श॒क्राय॑ । भरा॒ पिब॒न्नर्या॑य ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 2 | Mantra No : 23
In English:
Seer : medhaatithiH kaaNvaH priyamedhashchaa~NgirasaH | Devta : indra: | Metre : nichRRidaarShiigaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : jyeShThena sotarindraaya soma.m viiraaya shakraaya . bharaa pibannaryaaya .
Component Words : jyeShThena . sotaH . indraaya . somam . viiraaya . shakraaya . bhara . pibat . naryaaya . 8.2.23
In Hindi:
ऋषि : मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृदार्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : ज्येष्ठे॑न । सो॒तः॒ । इन्द्रा॑य । सोम॑म् । वी॒राय॑ । श॒क्राय॑ । भर॑ । पिब॑त् । नर्या॑य ॥ ८.२.२३
पदार्थ : (सोतः) हे सोमरसोत्पादक ! (वीराय) शत्रुओं का विशेषतया नाश करनेवाले (शक्राय) समर्थ (नर्याय) मनुष्यों के हितकारक (इन्द्राय) कर्मयोगी के लिये (ज्येष्ठेन) सबसे पूर्वभाग के (सोमं) सोमरस को (भर) आहरण करो, जिसको वह (पिबत्) पान करे=पीवे ॥२३॥
भावार्थ : सोमरस बनानेवाले को “सोता” कहते हैं, याज्ञिक लोगों का कथन है कि हे सोता ! शत्रुओं के नाशक, सब कामों के पूर्ण करने में समर्थ तथा सबके हितकारक कर्मयोगी के लिये सर्वोत्तम सोमरस भेट करो, जिसको वह पानकर प्रसन्न हुए सद्गुणों की शिक्षा द्वारा हमको अभ्युदय सम्पन्न करे ॥२३ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : मेधातिथिः काण्वः प्रियमेधश्चाङ्गिरसः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृदार्षीगायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : ज्येष्ठे॑न । सो॒तः॒ । इन्द्रा॑य । सोम॑म् । वी॒राय॑ । श॒क्राय॑ । भर॑ । पिब॑त् । नर्या॑य ॥ ८.२.२३
भावार्थ :