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Rigveda / 8 / 8 / 9

आ वां॒ विप्र॑ इ॒हाव॒सेऽह्व॒त्स्तोमे॑भिरश्विना । अरि॑प्रा॒ वृत्र॑हन्तमा॒ ता नो॑ भूतं मयो॒भुवा॑ ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 8 | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : सध्वंशः काण्वः | देवता : अश्विनौ | छन्द : निचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : आ । वा॒म् । विप्रः॑ । इ॒ह । अव॑से । अह्व॑त् । स्तोमे॑भिः । अ॒श्वि॒ना॒ । अरि॑प्रा । वृत्र॑हन्ऽतमा । ता । नः॒ । भू॒त॒म् । म॒यः॒ऽभुवा॑ ॥ ८.८.९

पदार्थ : (अश्विना) हे व्यापक (अरिप्रा) निष्पाप (वृत्रहन्तमा) शत्रुनाशक ! (वाम्) आपको (विप्रः) उपासक ने (इह) यहाँ यज्ञ में (अवसे) रक्षा के लिये (स्तोमेभिः) स्तोत्रों द्वारा (आह्वत्) बुलाया है (ता) वह आप (नः) हमारे लिये (मयोभुवा) सुखप्रद (भूतम्) हों ॥९॥

भावार्थ : हे सेनाध्यक्ष तथा सभाध्यक्ष ! आप पाप से रहित, शत्रुनाशक तथा यज्ञों के रहस्य को जाननेवाले हैं । हम लोग स्तोत्रों द्वारा आपका आह्वान करते हैं, कृपा करके यहाँ यज्ञ में सम्मिलित हों ॥९ ॥