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Rigveda / 8 / 9 / 8

आ नू॒नं र॒घुव॑र्तनिं॒ रथं॑ तिष्ठाथो अश्विना । आ वां॒ स्तोमा॑ इ॒मे मम॒ नभो॒ न चु॑च्यवीरत ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 9 | Mantra No : 8

In Hindi:

ऋषि : शशकर्णः काण्वः | देवता : अश्विनौ | छन्द : अनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : आ । नू॒नम् । र॒घुऽव॑र्तनिम् । रथ॑म् । ति॒ष्ठा॒थः॒ । अ॒श्वि॒ना॒ । आ । वा॒म् । स्तोमाः॑ । इ॒मे । मम॑ । नभः॑ । न । चु॒च्य॒वी॒र॒त॒ ॥ ८.९.८

पदार्थ : (अश्विना) हे व्यापक बलवाले ! आप (रघुवर्तनिम्) शीघ्रगामी (रथम्) रथ पर (नूनम्) निश्चय (आतिष्ठाथः) आरूढ़ हों (इमे, मम, स्तोमाः) ये मेरे स्तोत्र (नभः, न) सूर्यसदृश (वाम्) आपको (आचुच्यवीरत) अभिमुख आह्वान कर रहे हैं ॥८॥

भावार्थ : हे बलवान् सभाध्यक्ष तथा सेनाध्यक्ष ! आप अपने शीघ्रगामी देदीप्यमान रथपर चढ़कर हमारे यज्ञ को प्राप्त हों, हम स्तोत्रों द्वारा आपका आह्वान करते हैं ॥८ ॥