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Rigveda / 8 / 9 / 9

यद॒द्य वां॑ नासत्यो॒क्थैरा॑चुच्युवी॒महि॑ । यद्वा॒ वाणी॑भिरश्विने॒वेत्का॒ण्वस्य॑ बोधतम् ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 9 | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : शशकर्णः काण्वः | देवता : अश्विनौ | छन्द : पादनिचृदनुष्टुप् | स्वर : गान्धारः

विषय :

पदपाठ : यत् । अ॒द्य । वा॒म् । ना॒स॒त्या॒ । उ॒क्थैः । आ॒ऽचु॒च्यु॒वी॒महि॑ । यत् । वा॒ । वाणी॑भिः । अ॒श्वि॒ना॒ । ए॒व । इत् । का॒ण्वस्य॑ । बो॒ध॒त॒म् ॥ ८.९.९

पदार्थ : (नासत्या) हे सत्यवादिन् ! (यत्, अद्य) जो इस समय (वाम्) आपको (उक्थेभिः) वेदवाणियों से (आचुच्युवीमहि) आह्वान करें (यद्, वा, अश्विना) हे व्यापकशक्तिवाले ! (वाणीभिः) जो संकल्पित वाणियों द्वारा आह्वान करें तो (एव, इत्) निश्चय ही (काण्वस्य) विद्वानों के पुत्रों के आह्वान को (बोधतम्) आप जानें ॥९॥

भावार्थ : हे सत्यसङ्कल्प सभाध्यक्ष तथा सेनाध्यक्ष ! हम विद्वान् लोग वेदों के स्तोत्रों द्वारा तथा निज वाणियों द्वारा आपका आह्वान करते हैं, आप हमारे इस भाव को जानकर अवश्य हमारे यज्ञ को प्राप्त हों ॥९ ॥