Rigveda / 8 / 16 / 4
यस्यानू॑ना गभी॒रा मदा॑ उ॒रव॒स्तरु॑त्राः । ह॒र्षु॒मन्त॒: शूर॑सातौ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 16 | Mantra No : 4
In English:
Seer : irimbiThiH kaaNvaH | Devta : indra: | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : yasyaanuunaa gabhiiraa madaa uravastarutraaH . harShumantaH shuurasaatau .
Component Words : yasya . anuunaaH . gabhiiraaH . madaaH . uravaH . tarutraaH . harShu.amantaH . shuura.asaatau . 8.16.4
In Hindi:
ऋषि : इरिम्बिठिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : यस्य॑ । अनू॑नाः । ग॒भी॒राः । मदाः॑ । उ॒रवः॑ । तरु॑त्राः । ह॒र्षु॒ऽमन्तः॑ । शूर॑ऽसातौ ॥ ८.१६.४
पदार्थ : (यस्य) जिसकी (शूरसातौ) शूरों को देने के लिये (मदाः) उत्साहादि शक्तियें (अनूनाः) कम न होनेवाली (गभीराः) अगाध (उरवः) विस्तीर्ण (तरुत्राः) शत्रुओं से पार करनेवाली (हर्षुमन्तः) और आह्लाद उत्पन्न करनेवाली हैं ॥४॥
भावार्थ : वह महान् बलसम्पन्न परमात्मा, जिसकी शक्तियें शूरवीरों को उत्साह तथा आह्लादजनक हैं, वे ही शत्रुओं को विजय करानेवाली, सर्वत्र विस्तीर्ण और अगाध हैं अर्थात् जिनका पारावार नहीं, परमात्मा अपने उपासक योद्धाओं को उक्त शक्ति प्रदान कर विजय प्राप्त कराते हैं, अत एव विजय की कामनावाले योद्धाओं को निरन्तर उसकी उपासना में प्रवृत्त रहना चाहिये ॥४ ॥
In Sanskrit:
ऋषि : इरिम्बिठिः काण्वः | देवता : इन्द्र: | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : यस्य॑ । अनू॑नाः । ग॒भी॒राः । मदाः॑ । उ॒रवः॑ । तरु॑त्राः । ह॒र्षु॒ऽमन्तः॑ । शूर॑ऽसातौ ॥ ८.१६.४
भावार्थ :