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Rigveda / 8 / 20 / 9

प्रति॑ वो वृषदञ्जयो॒ वृष्णे॒ शर्धा॑य॒ मारु॑ताय भरध्वम् । ह॒व्या वृष॑प्रयाव्णे ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 8 | Sukta : 20 | Mantra No : 9

In Hindi:

ऋषि : सोभरिः काण्वः | देवता : मरूतः | छन्द : निचृदुष्णिक् | स्वर : ऋषभः

विषय :

पदपाठ : प्रति॑ । वः॒ । वृ॒ष॒त्ऽअ॒ञ्ज॒यः॒ । वृष्णे॑ । शर्धा॑य । मारु॑ताय । भ॒र॒ध्व॒म् । ह॒व्या । वृष॑ऽप्रयाव्णे ॥ ८.२०.९

पदार्थ : (वृषदञ्जयः) हे कामनाप्रद योद्धाओं को बुलानेवाले मनुष्यो ! (वः) तुम सब (वृष्णे) कामनाओं की वर्षा करनेवाले (मारुताय) योद्धाओं का (वृषप्रयाव्णे) बलिष्ठ सैनिकवाली (शर्धाय) सेना के लिये (हव्या) उसके दातव्य भागों को (प्रतिभरध्वम्) प्रतिहरण करते रहो अर्थात् उन्हें देते रहो ॥९॥

भावार्थ : हे प्रजाजनो ! तुम अपनी कामनाओं को पूर्ण करनेवाले योद्धाओं को बुलाकर सदैव उनका सत्कार करो, उनसे शूरवीरतादि गुण धारण करके बलवान् होओ और उनके दातव्यभाग को कभी मत रोको, सदैव देते रहो ॥९ ॥ तात्पर्य्य यह है कि जो जनता योद्धाओं के सैनिक विभागों का यथायोग्य मान करती हुई उनसे धीर वीरतादि गुणों की शिक्षा प्राप्त कर अनुष्ठान करती है, वह सदैव सुखी रहती है ॥