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Rigveda / 9 / 64 / 13

इ॒षे प॑वस्व॒ धार॑या मृ॒ज्यमा॑नो मनी॒षिभि॑: । इन्दो॑ रु॒चाभि गा इ॑हि ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 64 | Mantra No : 13

In Hindi:

ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : इ॒षे । प॒व॒स्व॒ । धार॑या । मृ॒ज्यमा॑नः । म॒नी॒षिऽभिः॑ । इन्दो॒ इति॑ । रु॒चा । अ॒भि । गाः । इ॒हि॒ ॥ ९.६४.१३

पदार्थ : (इन्दो) हे ऐश्वर्ययुक्त परमात्मन् ! आप (इषे) ऐश्वर्य के लिये (पवस्व) हमको योग्य बनाएँ और (मनीषिभिः) बुद्धिमानों से (अभि मृज्यमानः) उपास्यमान आप (धारया) अपने आनन्द की वृष्टि से (गाः) हमारी इन्द्रियों को पवित्र करें। (रुचा) अपने प्रकाशस्वरूप से (इहि) आकर हमारे अन्तःकरण को पवित्र कीजिये ॥१३॥

भावार्थ : जो लोग शुद्ध अन्तःकरण से परमात्मा की उपासना करते हैं, परमात्मा उनकी शक्तियों को बढ़ाता है और उनकी इन्द्रियों को विमल करके ऐश्वर्यप्राप्ति के योग्य बनाता है ॥१३॥