Rigveda / 9 / 64 / 14
पु॒ना॒नो वरि॑वस्कृ॒ध्यूर्जं॒ जना॑य गिर्वणः । हरे॑ सृजा॒न आ॒शिर॑म् ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 64 | Mantra No : 14
In English:
Seer : kashyapaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : punaano varivaskRRidhyuurja.m janaaya girvaNaH . hare sRRijaana aashiram .
Component Words : punaanaH . varivaH . kRRidhi . uurjam . janaaya . girvaNaH . hare . sRRijaanaH . aa.ashiram . 9.64.14
In Hindi:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : पु॒ना॒नः । वरि॑वः । कृ॒धि॒ । ऊर्ज॑म् । जना॑य । गि॒र्व॒णः॒ । हरे॑ । सृ॒जा॒नः । आ॒ऽशिर॑म् ॥ ९.६४.१४
पदार्थ : (हरे) हे दुष्टों की शक्तियों को हरनेवाले परमात्मन् ! आप हमको (वरिवः) ऐश्वर्यसम्पन्न करें। (गिवर्णः) आप वैदिक वाणियों द्वारा उपासना करने योग्य हैं और (पुनानः) पवित्र करनेवाले हैं। आप संसार के लिये (आशिरम्) मङ्गल (सृजानः) करते हुए (जनाय) अपने भक्त के लिये (ऊर्जम्) बल (कृधि) करें ॥१४॥
भावार्थ : परमात्मा दुष्टों की शक्तियों को हर लेता है और श्रेष्ठों को अभ्युदय दे करके बढ़ाता है ॥
In Sanskrit:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : पु॒ना॒नः । वरि॑वः । कृ॒धि॒ । ऊर्ज॑म् । जना॑य । गि॒र्व॒णः॒ । हरे॑ । सृ॒जा॒नः । आ॒ऽशिर॑म् ॥ ९.६४.१४
भावार्थ :