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Rigveda / 9 / 64 / 27

पु॒ना॒न इ॑न्दवेषां॒ पुरु॑हूत॒ जना॑नाम् । प्रि॒यः स॑मु॒द्रमा वि॑श ॥

Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 64 | Mantra No : 27

In Hindi:

ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः

विषय :

पदपाठ : पु॒ना॒नः । इ॒न्दो॒ इति॑ । ए॒षा॒म् । पुरु॑ऽहूत । जना॑नाम् । प्रि॒यः । स॒मु॒द्रम् । आ । वि॒श॒ ॥ ९.६४.२७

पदार्थ : (पुनानः) हे सबको पवित्र करनेवाले ! (पुरुहूत) सर्वपूज्य ! (इन्दो) सर्वप्रकाशक (प्रियः) सबके प्रिय परमात्मन् ! (एषां जनानाम्) इन उपासक पुरुषों के (समुद्रम्) द्रवीभूत अन्तःकरण को (आविश) अपनी अभिव्यक्ति से शुद्ध करिये ॥२

भावार्थ : जो लोग विद्या और विनय से सम्पन्न हैं, उनके अन्तःकरण को परमात्मा अवश्यमेव पवित्र करता है ॥२७॥