Rigveda / 9 / 64 / 28
दवि॑द्युतत्या रु॒चा प॑रि॒ष्टोभ॑न्त्या कृ॒पा । सोमा॑: शु॒क्रा गवा॑शिरः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 64 | Mantra No : 28
In English:
Seer : kashyapaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : viraaDgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : davidyutatyaa ruchaa pariShTobhantyaa kRRipaa . somaaH shukraa gavaashiraH .
Component Words : davidyutatyaa . ruchaa . pari.astobhantyaa . kRRipaa . somaaH . shukraaH . go.aaashiraH . 9.64.28
In Hindi:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : दवि॑द्युतत्या । रु॒चा । प॒रि॒ऽस्तोभ॑न्त्या । कृ॒पा । सोमाः॑ । शु॒क्राः । गोऽआ॑शिरः ॥ ९.६४.२८
पदार्थ : (सोमाः) सर्वोत्पादक (शुक्राः) बलस्वरूप (गवाशिरः) इन्द्रियागोचर परमात्मा (दविद्युतत्या) अपनी उज्ज्वल ज्योति से (रुचा) जो ज्ञानदीप्तिवाली है (परिस्तोभन्त्या) और जो सर्वोपरि शोभावाली है, (कृपा) ऐसी कृपादृष्टि से हमारा कल्याण करें ॥२८॥
भावार्थ : परमात्मा जिन लोगों पर अपनी कृपादृष्टि करता है, उनका कल्याण अवश्यमेव होता है ॥२८॥
In Sanskrit:
ऋषि : कश्यपः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : दवि॑द्युतत्या । रु॒चा । प॒रि॒ऽस्तोभ॑न्त्या । कृ॒पा । सोमाः॑ । शु॒क्राः । गोऽआ॑शिरः ॥ ९.६४.२८
भावार्थ :