Rigveda / 9 / 67 / 8
क॒कु॒हः सो॒म्यो रस॒ इन्दु॒रिन्द्रा॑य पू॒र्व्यः । आ॒युः प॑वत आ॒यवे॑ ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 67 | Mantra No : 8
In English:
Seer : gotamoH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : viraaDgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : kakuhaH somyo rasa indurindraaya puurvyaH . aayuH pavata aayave .
Component Words : kakuhaH . somyaH . rasaH . induH . indraaya . puurvyaH . aayuH . pavate . aayave . 9.67.8
In Hindi:
ऋषि : गोतमोः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय :
पदपाठ : क॒कु॒हः । सो॒म्यः । रसः॑ । इन्दुः॑ । इन्द्रा॑य । पू॒र्व्यः । आ॒युः । प॒व॒ते॒ । आ॒यवे॑ ॥ ९.६७.८
पदार्थ : (ककुहः) महान् (सोम्यः) सौम्य स्वभाव (इन्दुः) सर्वैश्वर्यसंपन्न (आयुः) सर्वत्र गन्ता (रसः) रसस्वरूप (पूर्व्यः) अनादि परमात्मा (आयवे) सर्वत्र गतिवाले (इन्द्राय) कर्मयोगी को (पवते) पवित्र करता है ॥८॥
भावार्थ : इन्द्र शब्द के अर्थ यहाँ केवल कर्मयोगी नहीं, किन्तु कर्मयोगी, ज्ञानयोगी दोनों के हैं। तात्पर्य यह है कि जो पुरुष कर्म वा ज्ञान द्वारा परमात्मा को उपलब्ध करना चाहते हैं, उनके लिए परमात्मा सदैव सुलभ है ॥८॥
In Sanskrit:
ऋषि : गोतमोः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्गायत्री | स्वर : षड्जः
पदपाठ : क॒कु॒हः । सो॒म्यः । रसः॑ । इन्दुः॑ । इन्द्रा॑य । पू॒र्व्यः । आ॒युः । प॒व॒ते॒ । आ॒यवे॑ ॥ ९.६७.८
भावार्थ :