Rigveda / 9 / 85 / 9
अधि॒ द्याम॑स्थाद्वृष॒भो वि॑चक्ष॒णोऽरू॑रुच॒द्वि दि॒वो रो॑च॒ना क॒विः । राजा॑ प॒वित्र॒मत्ये॑ति॒ रोरु॑वद्दि॒वः पी॒यूषं॑ दुहते नृ॒चक्ष॑सः ॥
Veda : Rigveda | Mandal : 9 | Sukta : 85 | Mantra No : 9
In English:
Seer : veno bhaargavaH | Devta : pavamaanaH somaH | Metre : viraaDjagatii | Tone : niShaadaH
Subject : English Translation will be uploaded as and when ready
Verse : adhi dyaamasthaadvRRiShabho vichakShaNo.aruuruchadvi divo rochanaa kaviH . raajaa pavitramatyeti roruvaddivaH piiyuuSha.m duhate nRRichakShasaH .
Component Words : adhi . dyaam . asthaat . vRRiShabhaH . vi.achakShaNaH . aruuruchaat . vi . divaH . rochanaa . kaviH . raajaa . pavitram . ati . eti . roruvat . divaH . piiyuuSham . duhate nRRichakShasaH . 9.85.9
In Hindi:
ऋषि : वेनो भार्गवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्जगती | स्वर : निषादः
विषय :
पदपाठ : अधि॑ । द्याम् । अ॒स्था॒त् । वृ॒ष॒भः । वि॒ऽच॒क्ष॒णः । अरू॑रुचात् । वि । दि॒वः । रो॒च॒ना । क॒विः । राजा॑ । प॒वित्र॑म् । अति॑ । ए॒ति॒ । रोरु॑वत् । दि॒वः । पी॒यूष॑म् । दु॒ह॒ते॒ नृ॒चक्ष॑सः ॥ ९.८५.९
पदार्थ : (कविः) सर्वज्ञ परमात्मा (दिवो रोचना) द्युलोक के प्रकाशक नक्षत्रों को (अरूरुचत्) प्रकाश करता है, वह परमात्मा (विचक्षणः) विविध पदार्थों का द्रष्टा है और (वृषभः) बलवाला है। (अधिद्यामस्थात्) द्युलोक को आश्रित करके स्थिर है। (राजा) सबका प्रकाशक है और (पवित्रमत्योति) सर्वोपरि पवित्र है। (रोरुवद्दिवः) जो द्युलोक को भी शब्दायमान कर रहा है। (पीयूषं) उस अमृतमय को (नृचक्षसः) विज्ञानी लोग (दुहते) परिपूर्ण करते हैं ॥९॥
भावार्थ : द्युलोक के नक्षत्रादिकों का प्रकाशक स्वयंप्रकाश परमात्मा ही है। उसी से सूर्य्यचन्द्रादिकों का प्रकाश होता है। वही स्वतःप्रकाशस्वरूप परमात्मा (पीयूषं) अमृत का धाम है। उसी से नित्य सुख मुक्ति की इच्छा करनी चाहिये ॥९॥
In Sanskrit:
ऋषि : वेनो भार्गवः | देवता : पवमानः सोमः | छन्द : विराड्जगती | स्वर : निषादः
पदपाठ : अधि॑ । द्याम् । अ॒स्था॒त् । वृ॒ष॒भः । वि॒ऽच॒क्ष॒णः । अरू॑रुचात् । वि । दि॒वः । रो॒च॒ना । क॒विः । राजा॑ । प॒वित्र॑म् । अति॑ । ए॒ति॒ । रोरु॑वत् । दि॒वः । पी॒यूष॑म् । दु॒ह॒ते॒ नृ॒चक्ष॑सः ॥ ९.८५.९
भावार्थ :