Rigveda / 5 / 5 / 8
इळा॒ सर॑स्वती म॒ही ति॒स्रो दे॒वीर्म॑यो॒भुवः॑। ब॒र्हिः सी॑दन्त्व॒स्रिधः॑ ॥८॥
Veda : Rigveda | Mandal : 5 | Sukta : 5 | Mantra No : 8
In English:
Seer : vasushruta aatreyaH | Devta : aapriyaH | Metre : nichRRidgaayatrii | Tone : ShaDjaH
Subject : English Translation Under Process
Verse : iLaa sarasvatii mahii tisro deviirmayobhuvaH. barhiH siidantvasridhaH .8.
Component Words : iLaa. sarasvatii. mahii. tisraH. deviiH. mayaH.abhuvaH. barhiH. siidantuH. asridhaH .8.
In Hindi:
ऋषि : वसुश्रुत आत्रेयः | देवता : आप्रियः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : फिर उसी विषय को कहते हैं ॥
पदपाठ : इळा॑। सर॑स्वती। म॒ही। ति॒स्रः। दे॒वीः। म॒यः॒ऽभुवः॑। ब॒र्हिः। सी॒द॒न्तुः॒। अ॒स्रिधः॑ ॥८॥
पदार्थ : हे मनुष्यो ! जैसे (अस्रिधः) नहीं नाश करनेवाली (इळा) प्रशंसित विद्या (सरस्वती) वाणी (मही) भूमि (मयोभुवः) सुख को करानेवाली (तिस्रः) तीन (देवीः) श्रेष्ठ गुणवती (बर्हिः) उत्तम गृहाश्रम को (सीदन्तु) प्राप्त हों, वैसे ही आप लोग भी प्राप्त होओ ॥८॥
भावार्थ : हे स्त्री और पुरुषो ! आप लोग विद्या उत्तम प्रकार शिक्षित वाणी और भूमि के राज्य को सुख के लिये प्राप्त हूजिये ॥८॥
In Sanskrit:
ऋषि : वसुश्रुत आत्रेयः | देवता : आप्रियः | छन्द : निचृद्गायत्री | स्वर : षड्जः
विषय : पुनस्तमेव विषयमाह ॥
पदपाठ : इळा॑। सर॑स्वती। म॒ही। ति॒स्रः। दे॒वीः। म॒यः॒ऽभुवः॑। ब॒र्हिः। सी॒द॒न्तुः॒। अ॒स्रिधः॑ ॥८॥
पदार्थ : (इळा) प्रशंसिता विद्या (सरस्वती) वाक् (मही) भूमिः (तिस्रः) (देवीः) दिव्यगुणाः (मयोभुवः) सुखं भावुकाः (बर्हिः) उत्तमं गृहाश्रमम् (सीदन्तु) प्राप्नुवन्तु (अस्रिधः) अहिंस्राः ॥८॥
अन्वय : हे मनुष्या ! यथाऽस्रिध इळा सरस्वती मही मयोभुवस्तिस्रो देवीर्बर्हिः सीदन्तु तथैव यूयमपि सीदत ॥८॥
भावार्थ : हे स्त्रीपुरुषा ! यूयं विद्यां सुशिक्षितां वाचं भूमिराज्यं च सुखाय प्राप्नुत ॥८॥