Donation Appeal Download Our App
Choose Mantra
Rigveda / 5 / 57 / 6

ऋ॒ष्टयो॑ वो मरुतो॒ अंस॑यो॒रधि॒ सह॒ ओजो॑ बा॒ह्वोर्वो॒ बलं॑ हि॒तम्। नृ॒म्णा शी॒र्षस्वायु॑धा॒ रथे॑षु वो॒ विश्वा॑ वः॒ श्रीरधि॑ त॒नूषु॑ पिपिशे ॥६॥

Veda : Rigveda | Mandal : 5 | Sukta : 57 | Mantra No : 6

In Hindi:

ऋषि : श्यावाश्व आत्रेयः | देवता : मरुतः | छन्द : जगती | स्वर : निषादः

विषय : फिर मरुद्विषय में यान चलाने के फल को कहते हैं ॥

पदपाठ : ऋ॒ष्टयः॑। वः॒। म॒रु॒तः॒। अंस॑योः। अधि॑। सहः॑। ओजः॑। बा॒ह्वोः। वः॒। बल॑म्। हि॒तम्। नृ॒म्णा। शी॒र्षऽसु॑। आयु॑धा। रथे॑षु। वः॒। विश्वा॑। श्रीः। अधि॑। त॒नूषु॑। पि॒पि॒शे॒ ॥६॥

पदार्थ : हे (ऋष्टयः) ज्ञानवान् (मरुतः) मनुष्यो ! (वः) आप लोगों के (अंसयोः) भुजारूप दण्डों के मूलों में जो (सहः) सहन और (ओजः) पराक्रम तथा (बाह्वोः) बाहु सम्बन्धी (वः) आप लोगों का (बलम्) बल (हितम्) स्थित (शीर्षसु) मस्तकों (अधि) पर (नृम्णा) और मनुष्य रमते हैं जिनमें ऐसे (आयुधा) शस्त्र और अस्त्र (रथेषु) संग्रामार्थ वाहनों में वा (वः) आप लोगों के (विश्वा) सम्पूर्ण (श्रीः) धन वा शोभा (अधि, पिपिशे) अधिक आश्रय की जाती और (वः) आप लोगों के (तनूषु) शरीरों में धन वा शोभा अधिक आश्रयण की जाती, उनका आप लोग संग्रहण कीजिये ॥६॥

भावार्थ : जो मनुष्य शरीर और आत्मा से बलिष्ठ और आयुधों की विद्या में निपुण होकर उत्तम वाहन आदि सामग्रियों से युक्त हुए पुरुषार्थ करते हैं, वे धनवान् होते हैं ॥६॥